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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 60, Verse 15

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 60, verse 15 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 60 · श्लोक 15

इस समूह का संस्कृत श्लोक-संरेखण अभी परिष्कृत किया जा रहा है; नीचे इसका हिन्दी अर्थ दिया गया है।

हिन्दी अर्थ

भद्र, जिनमें उन्मत्त पुष्करावर्त नाम के प्रलयकारी मेघ बरसते हैं, उन्मत्त उत्पातकारी वायु बहती हैं तथा तोड़े गये बड़े-बड़े पर्वतों के भयंकर शब्दों से ब्रह्माण्डमंडप को जिन्होंने व्याप्त कर दिया है। ऐसे तत्‌-तत्‌ जगह के अन्दर प्रवृत्त हुए भी कल्पान्तों को, ये जगत्‌ परस्पर नहीं जान पाते