Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 60, Verse 16
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 60, verse 16 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 60 · श्लोक 16
संस्कृत श्लोक
ज्वलत्कल्पाग्निविस्फोटचटदैडविडास्पदान् ।
प्रतपद्द्वादशाकारकन्दुमार्तण्डमण्डलान् ॥ १६ ॥
हिन्दी अर्थ
धधक रही प्रलयाग्नि के
विस्फोटों से कुबेर के भवन जिनमें चट-चट शब्द कर रहे हैं, जिनमें आकार में गेंद के सदूश बारह
आदित्य मण्डल आकाश में चक्कर काटते रहते हैं, ऐसे कल्पान्तों को वे परस्पर नहीं देख पाते