Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 60, Verse 14
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 60, verse 14 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 60 · श्लोक 14
संस्कृत श्लोक
न पश्यन्ति न शृण्वन्ति कदाचित्कानिचित्क्वचित् ।
तानि कल्पमहाकल्पमहाजन्मैकतान्यथ ॥ १४ ॥
हिन्दी अर्थ
भद्र, अतः ये सब शून्यरूप हैं, इसलिए परमार्थ में ये कोई जगत् कहीं किसी समय न तो देखते हैं
और न सुनते ही हैं अतएव वे सब कल्प, महाकल्प ओर सर्ग में एकरूप ही हैं यानी उन सब
सृष्टियों की उन कल्पादि से समानरूपता ही है