Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 60, Verse 11
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 60, verse 11 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 60 · श्लोक 11
संस्कृत श्लोक
ततो जगद्वृन्दमयीं मायां संप्रेक्ष्य विस्मितः ।
अनादृत्यैव तां व्योम्नि विहर्तुमहमुद्यतः ॥ ११ ॥
हिन्दी अर्थ
उसके बाद मैंने असंख्य जगत् से युक्त माया देखी, उसे देखकर मुझे अत्यन्त आश्चर्य हुआ,
उसका भी अनादर ही कर आकाशमण्डल में विहार करने के लिए मैं उद्यत हो गया