Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 60, Verse 10
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 60, verse 10 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 60 · श्लोक 10
संस्कृत श्लोक
इत्याकर्ण्याहमालोक्य तां चारुवदनस्वनाम् ।
ललनेयं किमनयेत्यनादृत्यैव तां गतः ॥ १० ॥
हिन्दी अर्थ
वह चुनकर आपने कया किया; इस प्रशन पर कहते हैं
भद्र, यह सुनकर और उस सुन्दरमुखी एवं मधुरशब्दवाली रमणी को देखकर मैंने सोचा ह यह
तो स्त्री है, इससे मेरा क्या प्रयोजन सिद्ध होगा । उसके प्रति उपेक्षाकर वहाँ से मैं आगे बढा