Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 60, Verse 9
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 60, verse 9 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 60 · श्लोक 9
संस्कृत श्लोक
असदुचितरिक्तचेतनसंसृतिसरिति प्रमुह्यमानानाम् ।
अवलम्बनतटविटपिनमभिनौमि भवन्तमेव मुने ॥ ९ ॥
हिन्दी अर्थ
उसी आर्या छन्द को बतलाते हैं
हे मुने, खल पुरुषों के लिए ही अपनी योग्यता रखनेवाले काम, क्रोध आदि जितने दोष हैँ,
उनसे आपका अन्तःकरण सर्वथा अलिप्त हैं, आप संसाररूपी नदी में डूब जानेवाले जीवों के लिए
तीरस्थ आश्रयरूप वृक्ष हैं, अतः मैं आपको ही चारों ओर से प्रणाम करती हूँ