Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 6, Verse 46
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 6, verse 46 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 6 · श्लोक 46
संस्कृत श्लोक
नीतोऽस्मि परमं खेदमभिधावद्भिरिन्द्रियैः ।
एक एव महारण्ये तस्करैः पथिको यथा ॥ ४६ ॥
हिन्दी अर्थ
विषयों की ओर दौड़ रही इन
इन्द्रियों ने मुझे परम खेद में ऐसे पहुँचा दिया है, जैसे महाभयंकर जंगल में अकेले जा रहे पथिक को
चोर खेद में पहुँचा देते हैं