Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 6, Verse 45
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 6, verse 45 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 6 · श्लोक 45
संस्कृत श्लोक
इन्द्रियोत्तमरोगाणां भोगाशावर्जनादृते ।
नौषधानि न तीर्थानि न च मन्त्राश्च शान्तये ॥ ४५ ॥
हिन्दी अर्थ
युझे तो एक ही उपाय मालूम हैं, इसे कहते है /
भोगों की आशा के त्याग के सिवा इन इन्द्रियरूपी भयंकर रोगों की शान्ति के लिए न तो कोई
औषधियाँ हैं, न कोई तीर्थ हैं और न कोई मन्त्र ही दीखते हैं