Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 6, Verse 47
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 6, verse 47 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 6 · श्लोक 47
संस्कृत श्लोक
पङ्कवन्त्यप्रसन्नानि महादौर्भाग्यवन्ति च ।
गन्धिशैवलतुच्छानि पल्वलानीन्द्रियाणि च ॥ ४७ ॥
हिन्दी अर्थ
इसके बाद तुल्य विशेषणों द्वारा पल्वल आदि के साम्य से इन्द्रियों का वर्णन करते हैं /
कीचड़ों से पूर्ण, मलिन, महादुभग्युक्त, दुर्गन्धसहित शेवालों तथा उसके तुल्य गन्दे
पदार्थों से कुत्सित ये छोटी-छोटी तलैया ओर इन्द्रियाँ एक-सी हैं