Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 6, Verse 44
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 6, verse 44 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 6 · श्लोक 44
संस्कृत श्लोक
मनःसेनापतेः सेनामिमामिन्द्रियपञ्चकम् ।
जेतुं चेदस्ति मे यत्नो जयामि तदलं मुने ॥ ४४ ॥
हिन्दी अर्थ
हे
मुने, मनरूपी सेनापति की इन्द्रियपंचकरूपी इस सेना को जीतने का यदि कोई उपाय हो, तो
कृपाकर बतलाइये, ताकि मैं भलीभाँति इसे जीत सकूँ