Guru's AddaGuru's Adda

Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 53, Verse 21

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 53, verse 21 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 53 · श्लोक 21

संस्कृत श्लोक

शान्तं समं समुदयास्तमयैर्विहीनमाकारमुक्तमजमम्बरमच्छमेकम् । सर्वं सदा सदसदेकतयोदितात्म निर्वाणमाद्यमिदमुत्तमबोधरूपम् ॥ २१ ॥

हिन्दी अर्थ

श्रीरामभद्र, भावप्रत्ययों का अर्थ यानी त्व, तल्‌ आदि का अर्थ वही है, जो निर्वाण शब्द से कहलानेवाला विशुद्ध आत्मा है । वह शान्त, एकरूप, उदय अस्त से रहित, आकारो से शून्य, अज, आकाशवत्‌ व्यापक, स्वच्छ और अद्वितीय है । यह सर्वात्मक है, इसका रूप सत्‌ असत्‌ की एकता लेकर ही निरन्तर उदित है; सबका आदि है ओर उत्तम बोधरूप (आत्मज्ञानरूप) है