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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 53, Verse 20

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 53, verse 20 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 53 · श्लोक 20

संस्कृत श्लोक

पूर्णात्पूर्णं विसरति पूर्णे पूर्णं विराजते । पूर्णमेवोदितं पूर्णे पूर्णमेव व्यवस्थितम् ॥ २० ॥

हिन्दी अर्थ

श्रान्ति से जीव ओर जगत्‌ के रूप में ब्रह्म ही हैं और शान्ति क्रा विनाश हो जाने पर वास्तव ब्रह्मस्वरूप ही रहता हैं, इसमें पूर्वदर्शित धूर्णमदः इत्यादि श्रुति का अनुवाद करते हैं / पूर्णरूप ब्रह्म से पूर्णरूप ही जगत्‌ विस्तार को प्राप्त होता है, उसी पूर्ण में पूर्णात्म जगत्‌ विराजित है, पूर्ण ही पूर्ण में प्रकाशित होता है, अतः पूर्ण में पूर्णात्मक वस्तु ही ठीक-ठीक रूप से अन्त में व्यवस्थित हैं