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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 52, Verse 29

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 52, verse 29 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 52 · श्लोक 29

संस्कृत श्लोक

तद्विदा तत्पदस्थेन तन्मुक्तेनानुभूयते । अन्यैः केवलमाम्नातैरागमैरेव वर्ण्यते ॥ २९ ॥

हिन्दी अर्थ

उत समय भी वह विद्वानों के अनुभव से प्रिद्ध हैं, यह कहते हैं । उस परमपद में स्थित समस्त कल्पनाओं से निर्मुक्त तत्त्वज्ञानी ही इस परमात्म वस्तु का अनुभव करता है और दूसरे तो केवल वर्णित आगमों से इसका वर्णन मात्र करते हैं