Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 46, Verse 16
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 46, verse 16 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 46 · श्लोक 16
संस्कृत श्लोक
दृढं विषयवैरस्यमेव ध्यानमुदाहृतम् ।
तदेव परिपाकेन वज्रसारं भवत्यलम् ॥ १६ ॥
हिन्दी अर्थ
इस तरह ध्यान की उपपत्ति भी विष्यो से विरक्ति होने पर ही होती हैं. अन्यथा नहीं:
यह कहते हैं /
विषयों से जो दृढ़ वैराग्य है वही ध्यान कहा गया है और खूब परिपक्व हो जाने से वही वज के
तुल्य अत्यन्त दृढ़ हो जाता है