Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 45, Verse 32
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 45, verse 32 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 45 · श्लोक 32
संस्कृत श्लोक
परेण परिणामेन मिथश्चित्परमार्थयोः ।
तापेन हिमलेखेव भेदबुद्धिर्विलीयते ॥ ३२ ॥
हिन्दी अर्थ
दृश्य तत्त्व के शोधन से सन्मात्र परमार्थ ओर द्रष्टा के तत्त्व के शोधन से चिन्मात्र
परमार्थ के अखण्डेक्यरूप निरतिशयानन्दात्मभूत परमसाक्षात्कारवृत्तिरूप परिणाम से भेद बुद्धि
ऐसे नष्ट हो जाती है, जैसे ताप से हिम की लेखा