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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 39, Verse 38

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 39, verse 38 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 39 · श्लोक 38

संस्कृत श्लोक

मोहमहत्तारहितः स्फुरति मृतौ भवति भासते च तथा । बुद्ध्यादिकरणनिकरो यस्माद्दीपादिवालोकः ॥ ३८ ॥

हिन्दी अर्थ

भोगान्धकार की (संसारान्धकार की) निवृत्ति हो जाने पर बुद्धि आदि करणो का दल अज्ञानरूप आवरण से एवं स्थूल अध्यास से (भ्रान्ति से) रहित बन जाता है तथा ब्रह्माकारवृत्ति से चमके हुए बोध से चमकिला बन जाता है । यही कारण है कि उस समय स्फुरण से, दीप के प्रकाश के सदुश, चारों ओर व्याप्त होकर ब्रह्मभूत होकर भासने लग जाता है