Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 39, Verse 29
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 39, verse 29 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 39 · श्लोक 29
संस्कृत श्लोक
तैस्तु यो व्यवहारो मे तद्ब्रह्म ब्रह्मणि स्थितम् ।
ते यत्पश्यन्ति पश्यन्तु तत्तैरलमलं मम ॥ २९ ॥
हिन्दी अर्थ
अनुग्रह, उपदेश आदि जो मेरा व्यवहार उनके साथ होता है, वह
मेरी दृष्टि में स्वस्वरूप में स्थित परब्रह्मस्वरूप ही है । वे जो कुछ देखते हैं, उसे भले ही देखें, उनसे
हमें किसी तरह के प्रयोजन की सिद्धि नहीं होती