Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 39, Verse 28
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 39, verse 28 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 39 · श्लोक 28
संस्कृत श्लोक
अहं तु सन्मयस्तेषां स्वप्नः स्वप्नवतामिव ।
ते तु नूनमसन्तो मे सुषुप्तस्वप्नका इव ॥ २८ ॥
हिन्दी अर्थ
दसरा विशेष बतलाते हैं ।
जैसे स्वप्नवालों को स्वप्न सन्मय प्रतीत होता है, वैसे ही अज्ञानियों की दृष्टि से मेरी देह भी
सन्मय प्रतीत होती है। परन्तु ज्ञानियों की दृष्टि से वे उस प्रकार असद्रूप हैं, जिस प्रकार सुषुप्तिस्थ
पुरुष, की दृष्टि में स्वप्न