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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 37, Verse 17

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 37, verse 17 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 37 · श्लोक 17

संस्कृत श्लोक

कार्यकारणताढ्यानामुक्तीनामेव कः क्रमः । यो हेतुः स्पन्दने वायोर्द्रवत्वे सलिलस्य च ॥ १७ ॥

हिन्दी अर्थ

तथा कार्यकारण से परिपूर्ण उक्तियों मेँ ही सर्वस्वभावस्वरूप अविद्या के सिवा और दूसरा क्या हेतु है ? जो वायु के स्पन्दन मेँ हेतु है तथा जो हेतु जल के स्पन्दन में तथा आकाश की शून्यता में है वही हेतु, हे सौम्य, चिदात्मा के सृष्टि आदिरूप होने में हे