Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 37, Verse 16
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 37, verse 16 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 37 · श्लोक 16
संस्कृत श्लोक
मार्गयन्ति प्रबोधाय तैर्मृगैरलमस्तु नः ।
व्योमरूपे किलैकस्मिन्सर्वात्मनि तते सति ॥ १६ ॥
हिन्दी अर्थ
अतएव आकाशस्वरूप सर्वात्मक परिपूर्ण ब्रह्म में कार्य-कारण आदि दृश्य
सत्ता को स्वीकार कर जो लोग ब्रह्मज्ञान के लिए अनेक साधन ढूँढ़ते-फिरते हैं उन तार्किक मृगो या
शिष्य मृगो से हमें कोई प्रयोजन नहीं है