Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 37, Verse 18
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 37, verse 18 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 37 · श्लोक 18
संस्कृत श्लोक
शून्यत्वे नभसः सौम्य सर्गादित्वे चिदात्मनः ।
कार्यकारणभावादि ब्रह्मैव सकलं यदा ॥ १८ ॥
हिन्दी अर्थ
यही कारण है कि विद्वान् महानुभावों को, आगे चलकर उसका बाध हो जाने से, ष्टि आदि
के हेदु के निरूपण में निर्लज्ज बनना पड़ता है, यह कहते हैं /
जब कार्यकारण भावादिरूप सब ब्रह्म ही है, तो फिर ब्रह्म में सृष्टियों की कारणता का
प्रतिपादन करना निर्लज्जता है