Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 33, Verse 10
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 33, verse 10 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 33 · श्लोक 10
संस्कृत श्लोक
द्वौ व्याधी देहिनो घोरावयं लोकस्तथा परः ।
याभ्यां घोराणि दुःखानि भुङ्क्ते सर्वैर्हि पीडितः ॥ १० ॥
हिन्दी अर्थ
परलोक की चिकित्सा का वर्णन करने के लिए उपक्रम करते हैं ।
शरीरधारियों के लिए महाभयंकर दो व्याधियाँ हैं - एक तो यह लोक और दूसरा परलोक।
क्योकि इन्हीं दोनों के कारण पीड़ित होकर मनुष्य आध्यात्मिक आदि भावों से अनेक दुःख भोगता
है