Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 33, Verse 11
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 33, verse 11 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 33 · श्लोक 11
संस्कृत श्लोक
इहलोके यतन्ते ज्ञा व्याधौ भोगैर्दुरौषधैः ।
आजीवितं यथाशक्ति चिकित्सा नापरामये ॥ ११ ॥
हिन्दी अर्थ
इस लोक में अज्ञानी पुरुष क्षुधा, तृष्णा आदि व्याधियों के लिए अन्न, पान आदि
भोगरूप निकृष्ट औषधियों का अवलम्बनकर जीवनपर्यन्त यथाशक्ति प्रयत्न करते हैं, परन्तु
परलोक में नरक आदि व्याधियों के लिए भोगों से कुछ भी चिकित्सा नहीं होती