Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 32, Verse 10
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 32, verse 10 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 32 · श्लोक 10
संस्कृत श्लोक
दुःखं सदेव नाश्नाति सुप्तवत्तनुवासनः ।
रूपालोकमनस्कारान्संकल्परहितानिव ॥ १० ॥
हिन्दी अर्थ
जिस पुरुष की वासना हट गई है, वह पुरुष तो
नींद ले रहे पुरुष के सदुश प्रारब्ध प्राप्त दुःख का भी अनुभव उस तरह नहीं करता, जिस तरह
संकल्पशून्य रूपालोक तथा मानसिक दुःख आदि का अनुभव नहीं करता