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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 32, Verse 11

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 32, verse 11 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 32 · श्लोक 11

संस्कृत श्लोक

अत्यन्ततनुतामेत्य वासनैवैति मुक्तताम् । देशकालक्रियायोगात्पदार्थे भावनामिव ॥ ११ ॥

हिन्दी अर्थ

उपयुक्त सिद्धान्त से यही झलका कि वाग्रनाओं की वृद्धि से जैसे ससार का अनुभव होता हैं, वेसे ही वासनाओं के हास से ही देशकाल के करम से मुक्ति का अनुभव प्रिद्ध होता है, यह कहते हैं / अत्यन्त हास को प्राप्त हुई वासना ही देश, काल और क्रिया के सम्बन्ध से मुक्ति को ऐसे प्राप्त होती है, जैसे पदार्थ में भावना पदार्थ रूपता को प्राप्त होती है