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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 25, Verse 9

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 25, verse 9 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 25 · श्लोक 9

संस्कृत श्लोक

अनालोकनसंसिद्ध आलोकेनैव नश्यति । असदात्मा सदाभासो बालवेतालवत्क्षणात् ॥ ९ ॥

हिन्दी अर्थ

अविद्या से साधित वस्तु का परिणाम दिखलाते हैं / बालक को वेताल की तरह, सत्‌ की नाई भासित हो रहा असद्रूप यह संसार परमात्मतत्त्व के अज्ञान से सिद्ध हे । अतः वह परमात्मतत्त्व के ज्ञानरूप प्रकाश से ही क्षणभर में नष्ट हो जाता है