Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 25, Verse 10
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 25, verse 10 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 25 · श्लोक 10
संस्कृत श्लोक
सर्वदृश्यदृशो बाधे बोधसारतयैकताम् ।
यान्त्यशेषमहीपीठसरित्पूरा इवार्णवे ॥ १० ॥
हिन्दी अर्थ
भेद पैदा करनेवाली द्वश्यरूप उपाधियों का बाध हो जाने पर सभी ज्ञानो में एकता आ जाती
है, यह दिखलाते हैं ।
भेद पैदा करनेवाली दृश्यरूप उपाधियों का आत्मतत्त्व के ज्ञान से बाध हो जानेपर सम्पूर्ण
दृश्य, पदार्थों के ज्ञान बोधरूप से ऐसे एकता को प्राप्त हो जाते हैं, जैसे धरातल के सम्पूर्ण नदियों
के प्रवाह सागर में जाकर समुद्ररूप से एकता को प्राप्त हो जाते हैं