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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 214, Verse 48

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 214, verse 48 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 214 · श्लोक 48

संस्कृत श्लोक

देहयष्टिषु संयोज्य वनिता यक्षकर्दमम् । जग्मुस्ताण्डवनर्तक्यः श्रृङ्गारात्माङ्गणान्तरम् ॥ ४८ ॥

हिन्दी अर्थ

हे श्रीरामचन्द्रजी, पहले युग में आपने शिष्य के रूप में स्थित गुरुरूप मेरे मुख से निःसृत इस प्रकार का उपदेश सुना था, उस उपदेश से उस समय आपको बोध नहीं हुआ । उसके उपरान्त अज्ञानरूप दोष से फिर आप पुनर्जन्म से अन्य जगत्‌ का अनुभव कर आज इस त्रेतायुग में महाराज दशरथ के घर में उत्पन्न हुए है । जो आपने पहले जन्म में मुझसे पूछा था, उसीको आज पूछते हैं