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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 204, Verses 48–49

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 204, verses 48–49 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 204 · श्लोक 48,49

इस समूह का संस्कृत श्लोक-संरेखण अभी परिष्कृत किया जा रहा है; नीचे इसका हिन्दी अर्थ दिया गया है।

हिन्दी अर्थ

श्रीवसिष्टजी ने कहा : हे श्रीरामचन्द्रजी आपको बोध प्राप्त हो गया है आपके लिए अब श्रोतव्य कुछ भी अवशिष्ट नहीं है । आपकी बुद्धि कृतकृत्य हो गई है ओर यह प्राप्तव्य वस्तु को प्राप्तकर आत्मा में स्थित है । आप ही अपनी बुद्धि से विचारकर स्वयं कहिये कि आज आप स्वानुभव से केसे हैं और आपके लिए शेष श्रोतव्य क्या हे ?