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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 200, Verse 29

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 200, verse 29 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 200 · श्लोक 29

संस्कृत श्लोक

नृपप्रणाममालासु किंचिच्छान्तासु तास्वथ । मुनिमापूजयन्नाह सार्घ्यपात्रकरो नृपः ॥ २९ ॥

हिन्दी अर्थ

हे श्रीरामचन्द्रजी, इस प्रकार इस विपुल जनसमुदाय में जन्ममरणरूप संसार से छुटकारा पाने की इच्छा करनेवाले बहुविध प्रारब्धभोगानुकूल दृष्टिवाले बहुत से लोग विविध प्रकार से स्थित हैं