Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 20, Verse 3
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 20, verse 3 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 20 · श्लोक 3
संस्कृत श्लोक
जगत्पदार्थसार्थस्य विराट् सर्वस्य कारणम् ।
कारणेन समान्येव कार्याणि च भवन्त्यतः ॥ ३ ॥
हिन्दी अर्थ
अतः मिट्टी आदि हेतुओं से उत्पन्न सकोरे आदि मिट्टी के स्वभाव से ही ओत-प्रोत
रहते हैं, यह देखा गया है, अतः समस्त जगत् के पदार्थों का कारण विराट् होने से जगत् भी
विराट् के स्वभाव से ओत-प्रोत है