Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 20, Verse 2
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 20, verse 2 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 20 · श्लोक 2
संस्कृत श्लोक
सर्वं राम जगज्जातं तत्संकल्पं विदुर्बुधाः ।
तादृग्रूपं पञ्चकात्मविषयोन्मुखमाततम् ॥ २ ॥
हिन्दी अर्थ
चूँकि ब्रह्म पूर्व की उपासना से मिश्रित वासना से सृष्टि के आरम्भ में पंचभूतात्मक
विराट् स्वरूप बनकर उपासना के फलभूतपंचमहाभूतात्मक विषय-समष्टि का उपभोग करने
में तत्पर हुआ है, अतः विद्रान् पुरुष समस्त जगत् को विराट् पुरुष का एक संकल्प ही मानते
हँ