Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 193, Verse 16
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 193, verse 16 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 193 · श्लोक 16
संस्कृत श्लोक
सर्वं सदैवाहमनन्तमेकं न किंचिदेवाप्यथवातिशान्तः ।
सर्वं न किंचिच्च सदेकमस्मि न चास्मि चेतीयमहो नु शान्तिः ॥ १६ ॥
हिन्दी अर्थ
अज्ञान की असत्ता प्रमाणपूर्वक विचार से अलभ्य होने के कारण ही है, ऐसा कहते है ।
प्रामाणिक विचार से निरीक्षण करने पर जिसकी प्राप्ति नहीं होती ऐसा यह जगत् का मूलभूत
अज्ञान असत् ही है । इसी कारण उसका अनुभव भ्रम है