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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 193, Verse 15

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 193, verse 15 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 193 · श्लोक 15

संस्कृत श्लोक

निर्वाणमासे गतशङ्कमासे निरीहमासे सुसुखेऽहमासे । यथास्थितं नित्यमनन्तमासे तदेवमासे न कथं समासे ॥ १५ ॥

हिन्दी अर्थ

हे मुनिवर, यह भ्रान्ति किस कारण से थी यह प्रश्न भी इसके विषय में शोभा नहीं देता । विचार के लिए ही प्रश्न है वह इस विषय में सफल नहीं है, क्योकि विचार से सत्‌ का ही लाभ होता है असत्‌ का नहीं होता । भ्रान्तिमूलक ज्ञान असत्‌ है उसका निर्णय ही नहीं हो सकता, यह भाव हे