Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 193, Verse 14
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 193, verse 14 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 193 · श्लोक 14
संस्कृत श्लोक
ज्ञाताज्ञातमनिर्भासं ब्रह्मैकमजरं तथा ।
शून्यत्वैकत्वनीलत्वरूपमेकं नभो यथा ॥ १४ ॥
हिन्दी अर्थ
बालक के
वेताल की (भूत की) तरह जाग्रतकाल में प्रत्यक्ष दिखाई देने पर भी यह भ्रान्ति यथार्थ नहीं है । अविचार
से बद्धमूल हुई यह विचार से शान्त हो जाती हे