Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 192, Verse 13
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 192, verse 13 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 192 · श्लोक 13
संस्कृत श्लोक
मृगतृष्णाम्बुगन्धर्वनगरद्वीन्दुविभ्रमः ।
तथाऽविद्याभ्रमश्चायं विचारान्नोपलभ्यते ॥ १३ ॥
हिन्दी अर्थ
की दृष्टि में तो यह स्वभावभूत (ब्रह्मरूप) ही है, क्योकि कदाचित् अकस्मात् इस भास्य-भासक-
भानरूप त्रिपुटी के हम लोगों की दृष्टि में प्रतिभात होने पर भी तत्त्वज्ञान के अनुसन्धान से वह शीघ्र
ही मिट जाती हे