Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 191, Verse 71
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 191, verse 71 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 191 · श्लोक 71
इस समूह का संस्कृत श्लोक-संरेखण अभी परिष्कृत किया जा रहा है; नीचे इसका हिन्दी अर्थ दिया गया है।
हिन्दी अर्थ
श्रीवसिष्ठजी ने कहा : हे रघुवर, अज्ञानियों का दृष्टिगोचर जैसा जगत् है वह सत्य नहीं हे, ज्ञानियों
का ज्ञानगोचर जो है वह अद्वितीय तथा वाणी का अगोचर हे । भाव यह कि अज्ञपरिज्ञात भौतिक जगत्
का अपलाप करने पर उसकी (अज्ञ की) तत्त्वज्ञानियों द्वारा परिज्ञात नामरूपविहीन तत्त्ववस्तु विषय
होगी