Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 191, Verse 70
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 191, verse 70 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 191 · श्लोक 70
इस समूह का संस्कृत श्लोक-संरेखण अभी परिष्कृत किया जा रहा है; नीचे इसका हिन्दी अर्थ दिया गया है।
हिन्दी अर्थ
श्रीरामचन्द्रजी ने कहा : भगवन्, जिस चेत्य का (दृश्यका) सबको अनुभव होता है, उसका केसे
संभव नहीं है ? सकल जनों से और अपने अनुभूत विषय में इस प्रकार का अपलाप आप कैसे करते हैं
अर्थात् चेत्य का सर्वथा असंभव है तो लोगों के अनुभव का विषय कौन होगा ?