Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 191, Verse 6
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 191, verse 6 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 191 · श्लोक 6
संस्कृत श्लोक
भित्तौ प्रकाशो भातीव तत्कुड्यं भासनं च तत् ।
दृश्यस्यासंभवादादौ वक्ता द्रष्टा प्रदृश्यताम् ॥ ६ ॥
हिन्दी अर्थ
श्रीरामचन्द्रजी ने कहा : हे मुनिवर, चिदेकरस आत्मा के अन्दर उससे भिन्न ज्ञेयता कोन है यह
मुझसे कहने की कृपा कीजिये | इस ज्ञानशब्द की '"ज्ञप्तिज्ञनम्' यों भाव में व्युत्पत्ति करनी चाहिये
अथवा “ज्ञायतेऽनेन तत् ज्ञानम् यों करण में ?