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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 191, Verse 41

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 191, verse 41 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 191 · श्लोक 41

इस समूह का संस्कृत श्लोक-संरेखण अभी परिष्कृत किया जा रहा है; नीचे इसका हिन्दी अर्थ दिया गया है।

हिन्दी अर्थ

श्रीवसिष्ठजी ने कहा : वत्स, जीवन्मुक्ति के पूर्व देश, काल, क्रिया और द्रव्य के भेदज्ञानी अज्ञ की दृश्यसत्ता अज्ञानमात्र से अन्य नहीं है यानी अज्ञान से ही यह जगत्सत्ता उपस्थित है, इसका अन्य कारण नहीं है