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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 191, Verse 40

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 191, verse 40 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 191 · श्लोक 40

इस समूह का संस्कृत श्लोक-संरेखण अभी परिष्कृत किया जा रहा है; नीचे इसका हिन्दी अर्थ दिया गया है।

हिन्दी अर्थ

श्रीरामचन्द्रजी ने कहा : ब्रह्मन्‌, देश, काल, क्रिया और द्रव्य का भेदज्ञान रखनेवाले अज्ञानियों को सबका संभव न होने से यह जगद्दृष्टि कैसे उपस्थित हुई ? भाव यह कि तब अज्ञानियों की दृष्टि में प्रख्यात यह जगत्सत्ता किस कारण से उपस्थित हुई ?