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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 187, Verse 38

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 187, verse 38 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 187 · श्लोक 38

संस्कृत श्लोक

ततः सा परमा सत्ता सती तच्चेतनोन्मुखी । चिन्नामयोग्या भवति किंचिल्लभ्यतया तया ॥ ३८ ॥

हिन्दी अर्थ

इस प्रकार सकल जगद्गर्भित मन की परमाणुरूपता ही है, ऐसा कहते हैं। जगत्‌ मे जलान्तर्गत सूर्यकिरणों मे सबसे छोटे अणु का जो प्रमाण प्रसिद्ध है वही चित्त का परिमाण है। वही जीव हे, क्योकि "बालाग्रशतभागस्य शतधा कल्पितस्य च। भागो जीवः स विज्ञेयः स चानन्त्याय कल्पते" ऐसी श्रुति हे । इसलिए पुरुषों के (जीवों के) अन्दर जगत्‌ स्थित हे