Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 187, Verse 39
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 187, verse 39 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 187 · श्लोक 39
संस्कृत श्लोक
घनसंवेदनात्पश्चाद्भाविजीवादिनामिका ।
सा भवत्यात्मकलना यद्भवन्ती परं पदम् ॥ ३९ ॥
हिन्दी अर्थ
इस प्रकार जीव ओर जगत् के भेद का भी परिमार्जन हो गया, ऐसा कहते है ।
जैसे स्वप्नभूमियों में जो कुछ भी दृश्य हे वह सबका सब चित्त ही है वैसे ही जाग्रतजगत् में भी जो
कुछ भी दृश्य है वह सम्पूर्णतया चित्त ही है वही जीव है, इसलिए जगत् ओर जीव में कौन भेद है ?