Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 185, Verse 13
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 185, verse 13 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 185 · श्लोक 13
संस्कृत श्लोक
एषोऽहमेतद्वृत्तं मे सर्वं कथितवानहम् ।
यथावृत्तं यथादृष्टं यथाश्रुतमखण्डितम् ॥ १३ ॥
हिन्दी अर्थ
जैसे स्वाप्नाकाश मेँ स्तम्भ के न रहने पर भी
जीवचित् की स्तम्भता प्रतीत होती है वैसे ही यद्यपि इस चित् का नानात्व (भेद) इससे अभिन्न है
तथापि भिन्नवत् भासता हे