Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 183, Verse 1
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 183, verse 1 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 183 · श्लोक 1
संस्कृत श्लोक
कुन्ददन्त उवाच ।
ततः पृष्टो मया तत्र स गौर्याश्रमतापसः ।
तापसंशुष्कदर्भाग्रजराजर्जरमूर्धजः ॥ १ ॥
हिन्दी अर्थ
वृद्ध तपस्वी ने कहा : हे सज्जनो, भगवती गौरी उसी इस कदम्ब में अपनी इच्छा से दस वर्ष
बैठकर शिवजी के वामभागरूप मन्दिर को चली गई
सर्ग सन्दर्भ
एक सौ इक्यासीवाँ सर्ग समाप्त एक सौ बयासीवाँ सर्ग कदम्ब वृक्ष के नीचे स्थित तपस्वी द्वारा घर में उसके भाईयों का समागम और वर तथा शापों की हेतुसिद्धि का वर्णन |