Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 176, Verse 64
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 176, verse 64 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 176 · श्लोक 64
इस समूह का संस्कृत श्लोक-संरेखण अभी परिष्कृत किया जा रहा है; नीचे इसका हिन्दी अर्थ दिया गया है।
हिन्दी अर्थ
सादृश्य से भी वही यह लहरी है, वही यह दीपशिखा है इत्यादि प्रत्यभिज्ञाभ्रम लोक में प्रसिद्ध
हैं, ऐसा कहते है ।
जिसी जल में जैसे लहरी एक बार आती हे उसी जल में वैसे ही अभिन्न लहरी पुनः पुनः आती है
वैसी अवस्था में "सेवेयं लहरी" (यह वही लहरी है) ऐसा प्रत्यभिज्ञाभ्रम होता है वैसे ही सृष्टि के आदि में
कल्पनाधिष्ठान परम ब्रह्म मेँ जगत् को भी भ्रमरूप समझना चाहिये