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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 176, Verse 41

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 176, verse 41 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 176 · श्लोक 41

इस समूह का संस्कृत श्लोक-संरेखण अभी परिष्कृत किया जा रहा है; नीचे इसका हिन्दी अर्थ दिया गया है।

हिन्दी अर्थ

ऐसा मानने पर जगत्‌ की, प्रमाणो के अविषय ब्रह्म में अध्यासवश स्वप्न की तरह, अनिर्ववनीयतारूप प्रमाणअविषयता भी सिद्ध होगी यों अद्वैत का अविरोध होने से दूसरी अनुकूलता हमारे पक्ष में हुई, ऐसा कहते हैं। चूँकि ब्रह्म से अभिन्न यह विश्व प्रमाणों के अगोचर परम ब्रह्म से आविर्भूत है इसलिए प्रमाणों का अगोचर यह कुछ भी उदित नहीं हुआ