Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 176, Verse 21
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 176, verse 21 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 176 · श्लोक 21
संस्कृत श्लोक
परमाणोः परमाणोरिति सन्ति तनूदरे ।
अतनूनि जगन्त्युच्चैर्धनानीव च तान्यपि ॥ २१ ॥
हिन्दी अर्थ
एक निराकार परब्रह्म होकर भी अपनी अविद्या से पूर्ण सच्चिदानन्द भाव से च्युत हो
मनोभाव को प्राप्तकर समष्टिमनरूप ब्रह्मा अहंकारस्वरूप से तथा शरीर ओर जगत् के रूप से अनन्तरूप
होकर जड़ और चेतन जगत्रूप में स्थित है