Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 174, Verse 14
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 174, verse 14 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 174 · श्लोक 14
संस्कृत श्लोक
निर्विकल्पं समाधानं तदनन्तमिहोच्यते ।
यथास्थितमविक्षुब्धमासनं सर्वभासनम् ॥ १४ ॥
हिन्दी अर्थ
सागर मेँ जल के भँवरों की तरह चिदाकाश में हजारों करोड कल्पो तक वे ही या अन्य
सृष्टियाँ आती हैं जाती हैँ । हजारों करोड रूप से आए गये हुए अध्यासो से अधिष्ठान की एकरूपताकी
क्षति नहीं हो सकती, यह भाव है