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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 169, Verse 39

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 169, verse 39 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 169 · श्लोक 39

संस्कृत श्लोक

अच्छाच्छमम्बरं कृत्वा जगदप्यम्बरीकृतम् । शान्तशब्दपरश्वासं हा शेते सुखमात्मवान् ॥ ३९ ॥

हिन्दी अर्थ

भगवान श्रीवशिष्ठजी श्रीरामचन्द्रजी की आशंका की प्रशसा करते हुए समाधान की प्रतिज्ञा करते हैं । भगवान्‌ श्रीवसिष्ठजी ने कहा : वत्स श्रीरामचन्द्रजी, मैं आपके प्रश्न के (आक्षेप के) ऐसे ही टुकड़े कर डालता हूँ जैसे कि सिंह छोटे से कमजोर हाथी के टुकड़े-टुकड़े कर डालता है तथा जैसे भगवान्‌ सूर्य तिमिरराशि का उच्छेद कर एकमात्र प्रकाश की स्थापना करते हैं वैसे ही मैं एकमात्र अद्वैत की स्थापना करता हूँ